How to Learn Computer in Hindi

How to Learn Computer in Hindi
आप कंप्यूटर सीखना तो चाहते है लेकिन हिंदी में नेट पे बहुत कम लेख उपलब्ध होने के कारण सीख नहीं पा रहे है तो.....

How to Learn Computer in Hindi

Posted By: Dharmendra Goyal - 11:20 am

क्या आपने कंप्यूटर को काम में लेना अभी अभी शुरू ही किया है ? क्या आप विस्मय में पड़ जाते है जब आप क्लाउड, विंडोज, आइ एस पी या फिर ऐप शब्द किसी को बोलते हुए सुनते है ? शायद आप कंप्यूटर के बारे में थोड़ा बहुत जानने या सिखने के इच्छुक है । यदि आप वास्तव में यह सोचते है तो आप हमारे लेटेस्ट अपडेट्स को पढ़ कर आसानी से कंप्यूटर को उपयोग में लेना सिख सकते है । 

आप कंप्यूटर सीखना तो चाहते है लेकिन हिंदी में नेट पे बहुत कम लेख उपलब्ध होने के कारण सीख नहीं पा रहे है तो झटपट कंप्यूटर सीखने के पुस्तक को पीडीऍफ़ फाइल्स के रूप में अपने कंप्यूटर पर सेव कर ले और कंप्यूटर की बेसिक्स की जानकारी ले | वो भी एकदम मुफ्त !!! 

Introduction to Computer, Memory Units, Input Devices, Output Devices, Storage Devices
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How to set Windows, arrange icons, scrolling
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How to share PC to PC

Posted By: Dharmendra Goyal - 11:17 pm
घर में दो कंप्यूटर आ गए हैं - एक डेस्कटॉप और एक लैपटॉप, या फिर दोनों डेस्कटॉप या दोनों लैपटॉप। आपको जरूरत है एक बड़ी-सी मूवी या गेम को एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में डालने की। पेन ड्राइव छोटी पड़ गई है क्योंकि फाइल बड़ी है। अब क्या करें? क्या डीवीडी बर्न करके डेटा ट्रांसफर करें? उसमें बहुत वक्त लग जाएगा और डीवीडी (डिस्क) भी खरीदकर लानी होगी। लेकिन ठहरिए! आप दोनों कंप्यूटरों को आपस में जोड़ भी तो सकते हैं। उसी तरह जैसे दफ्तरों में कंप्यूटर आपस में एक-दूसरे से जुड़े होते हैं, नेटवर्क के जरिए। 
कैसे, बता रहे हैं बालेन्दु शर्मा दाधीच :

अगर आपको घर में दो कंप्यूटरों में डेटा ट्रांसफर करना हो तो जरूरत है तो सिर्फ एक केबल (तार) की, जिसे ईथरनेट क्रॉसओवर केबल कहते हैं। दोनों कंप्यूटरों में नेटवर्क कार्ड भी होना चाहिए, जो आज लगभग हर कंप्यूटर में पहले से ही लगा आता है। अगर आपके दोनों कंप्यूटरों में विंडोज का कोई-न-कोई वर्जन इन्स्टॉल्ड है तो उन्हें आपस में कनेक्ट करना चुटकियों का काम है।

ऐसी स्थितियां और भी आती हैं, जब आपको दो कंप्यूटरों को जोड़ने की जरूरत पड़ सकती है। मिसाल के तौर पर एक कंप्यूटर को पूरी तरह साफ (फॉर्मैट और रि-इन्स्टॉल) करने से पहले आप चाहेंगे कि उसका सारा डेटा किसी सुरक्षित जगह पर कॉपी कर लिया जाए। एक ग्राफिक डिजाइनर, जो एक कंप्यूटर में ग्राफिक्स के भारी-भरकम सॉफ्टवेयर रखता है और दूसरे में अपने कारोबार से जुड़ी फाइलें, भी ऐसी कनेक्टिविटी चाहेगा। या फिर कोई छोटा बिजनेसमैन, जिसके दफ्तर में दो कंप्यूटर हैं और उनके बीच फाइलों के लेनदेन की जरूरत पड़ती रहती है। किसी अफसर और उसके सेक्रेट्री के कंप्यूटरों को भी आपस में कनेक्ट करने की जरूरत पड़ सकती है तो दो छात्रों को होमवर्क शेयर करने के लिए भी। और हां, अगर दो भाई-बहनों को नेटवर्क गेम (जिनमें खिलाड़ी अलग-अलग कंप्यूटरों पर रहते हुए एक ही गेम में कम्पीट करते हैं) खेलने हैं तो फिर फ्लैश ड्राइव या एक्सटर्नल हार्ड ड्राइव भी कुछ नहीं कर सकती। दोनों कंप्यूटरों को कनेक्ट करना ही पड़ेगा।

क्रॉसओवर केबल 

अगर आपने कभी इंटरनेट कनेक्शन या नेटवर्क कनेक्शन का इस्तेमाल किया हो तो आपने यह केबल जरूर देखी होगी। इसके दोनों सिरों पर दो सॉकेट्स होते हैं, जो करीब-करीब वैसे ही होते हैं जैसे फोन और उसकी डिब्बी को कनेक्ट करने वाले तार में होते हैं। लेकिन ईथरनेट क्रॉसओवर केबल के सॉकेट्स टेलिफोन केबल के सॉकेट्स से थोड़े बड़े और चौड़े होते हैं। यह तार किसी इलेक्ट्रिसिटी शॉप, कंप्यूटर शॉप या स्टेशनरी शॉप पर मिल सकती है और कई साइजों में आती है। पांच मीटर की लंबाई वाली साधारण केबल की कीमत 50 रुपये के करीब होती है।

कैसे करें कनेक्ट
अपने कंप्यूटरों के पीछे की ओर (लैपटॉप में पीछे या फिर साइड में) लगे हुए नेटवर्क कार्ड को देखिए। नेटवर्क कार्ड कई तरह के होते हैं और उनमें एक से ज्यादा तरह के सॉकेट्स के लिए कनेक्टर्स बने हुए हो सकते हैं। लेकिन आपको एक ऐसा कनेक्टर ढूंढना है, जिसमें आपकी क्रॉसओवर केबल का सॉकेट आसानी से फिट होता हो। इसे तकनीकी भाषा में आरजे 45 कनेक्टर कहते हैं। दोनों कंप्यूटरों में ऐसे कनेक्टर ढूंढकर तार के दोनों सिरों (सॉकेट्स) को उनमें अच्छी तरह फिट कर दीजिए। क्या कहा आपने? दोनों कंप्यूटरों को जोड़ना इतना आसान था तो आपने पहले क्यों नहीं कर लिया? जी नहीं, यह तो अभी पहला चरण है। दूसरा चरण अभी बाकी है, जिसमें आप एक छोटा-सा घरेलू नेटवर्क तैयार करेंगे। घबराइए नहीं, बस तीन-चार मिनट की बात है।

भले ही कनेक्ट होने वाले कंप्यूटर सिर्फ दो हैं, लेकिन आपको एक छोटा-सा 'नेटवर्क' बनाने की जरूरत पड़ेगी। इसके लिए अपने विंडो कंप्यूटर में इस तरह आगे बढ़ें :

स्टेप 1 : जरूरी आईपी सेटिंग्स
विंडोज एक्सपी के लिए :

Start - Settings - Network Connections पर जाएं।

Local Area Connection को ढूंढें और राइट क्लिक करें। अब Properties को सलेक्ट करें, जिससे Local Area Connection Properties डायलॉग बॉक्स खुल जाएगा।

Internet Protocol (TCP/IP) सलेक्ट करें और Properties बटन दबाएं। इससे Internet Protocol (TCP/IP) Properties डायलॉग बॉक्स खुल जाएगा।

दोंनों ही कंप्यूटरों में Use the Following IP Address को चुनें और हर कंप्यूटर का यूनीक आईपी एड्रेस डालें। आईपी एड्रेस आपके कंप्यूटर की डिजिटल पहचान होता है। लोकल नेटवर्क के लिए 192.168.1. x आईपी एड्रेस का इस्तेमाल होता है, जिसमें x 1 से 255 के बीच कोई भी नंबर हो सकता है। अपने एक कंप्यूटर का आईपी एड्रेस 192.168.1.1 रख लें और दूसरे का 192.168.1.2

आईपी एड्रेस के नीचे Subnet Mask नामक बॉक्स दिखाई देगा, जिसमें 255.255.255.0 डालकर ओके बटन दबा दें। ध्यान रहे, यह प्रक्रिया दोनों कंप्यूटरों में करनी है। अगर दूसरा कंप्यूटर विंडोज एक्सपी नहीं बल्कि विंडोज विस्टा या विंडोज 7 है तो उसके लिए नीचे दिए गए तरीके का इस्तेमाल करें।

विंडोज 7 के लिए :
Start - Control Panel - Network and Internet - Network and Sharing Center पर जाएं और अब लेफ्ट ओर Change Adapter Settings पर क्लिक करें। अब खुलने वाले पेज में Local Area Networking का आइकन दिखाई देगा।

ज्इस पर राइट क्लिक करें और बाकी कदम उसी तरह उठाएं, जैसे विंडोज एक्सपी के लिए ऊपर दिए गए हैं।

स्टेप 2 : वर्कग्रुप बनाना
अब आपको एक वर्कग्रुप बनाना है, जिसके मेंबर ये दोनों कंप्यूटर होंगे। वर्कग्रुप कंप्यूटरों का एक ग्रुप है। एक नेटवर्क में कई वर्कग्रुप हो सकते हैं, लेकिन उस बारे में फिर कभी चर्चा करेंगे। वर्कग्रुप ऐसे बनाएं :

सबसे पहले Start ->Control Panel->System पर जाएं।

अब खुलने वाले डायलॉग बॉक्स में Computer Name tab पर जाएं और Change बटन पर क्लिक करें। इससे Computer Name Changes डायलॉग बॉक्स खुल जाएगा।

ज्यहां अपने कंप्यूटर का नाम (जैसे होम कंप्यूटर1 या लैपटॉप, डेस्कटॉप आदि) दे दें। यही प्रक्रिया दूसरे कंप्यूटर में भी दोहराएं और उसे एक अलग नाम दे दें।

ज्आपके कंप्यूटरों को जोड़ने वाले वर्कग्रुप (नेटवर्क) का भी एक नाम होना चाहिए। दोनों कंप्यूटर इसके सदस्य होंगे। इसका कोई अच्छा सा नाम सोच लीजिए, जैसे Home Network या My Network आदि।

कंप्यूटर का नाम देने के बाद उसके नीचे ही Member of Workgroup नामक बॉक्स में अपने वर्कग्रुप का नाम भर दीजिए (जैसे Home Network)। यह प्रोसेस दोनों कंप्यूटरों में पूरी करें। याद रहे, दोनों कंप्यूटरों के अपने नाम तो अलग-अलग हैं और आईपी एड्रेस भी अलग-अलग हैं, लेकिन वर्कग्रुप का नाम एक समान होना चाहिए।

ओके बटन दबा दें और कंट्रोल पैनल से बाहर आ जाएं। दोनों कंप्यूटर एक बार रिस्टार्ट होंगे। रिस्टार्ट होते ही आपका घरेलू नेटवर्क तैयार है।

Start - Control Panel - System and Security - System पर जाएं और Change Settingsलिंक को क्लिक करें। बाकी प्रोसेस वही है, जो विंडोज एक्सपी के लिए है।

स्टेप 3 : जरा-सी चेकिंग
आइए, अब देखते हैं कि क्या आपके दोनों कंप्यूटर कनेक्ट हो चुके हैं?

Start - Settings - Network Settings पर जाकर My Network Places पर क्लिक करें। अब Entire Network पर क्लिक करें और फिर Microsoft Windows Network पर डबल क्लिक करें। आपको अपने वर्कग्रुप का नाम दिखाई देगा। उस पर डबल क्लिक करके देखिए, दूसरे कंप्यूटर का नाम दिखाई देगा। जाहिर है, आपके दोनों कंप्यूटर एक-दूसरे से कनेक्ट हो चुके हैं। अब एक छोटा-सा प्रोसेस और बचता है, और वह है दूसरे कंप्यूटर की सामग्री को access करने का। उसके लिए हमें नेटवर्क शेयरिंग सुविधा का इस्तेमाल करना होगा।

विंडोज 7 के लिए:
Start - Control Panel - Network and Internet पर जाकर Home Group पर क्लिक करें। आपके नेटवर्क में मौजूद दूसरा कंप्यूटर दिखाई देगा।

स्टेप 4 : फोल्डर शेयरिंग
दोनों कंप्यूटरों में एक-एक ऐसा फोल्डर बना लीजिए, जिसकी सामग्री को आप दूसरे कंप्यूटर में access करना चाहते हैं। इसे कोई सुविधाजनक नाम दे दीजिए, जैसे Shared Laptop Folder और Shared Desktop Folder वगैरह।

इस फोल्डर पर राइट माउस क्लिक करके Properties पर क्लिक करें। अब खुलने वाले डायलॉग बॉक्स में Sharing tab को सलेक्ट कर लें। अब Share this folder को सलेक्ट करें और फिर
Shared Laptop Folder और Shared Desktop Folder जैसा कोई सुविधाजनक नाम दे दीजिए। दूसरे कंप्यूटर में आपको अपना शेयर्ड फोल्डर इसी नाम से दिखाई देगा। अब OK बटन दबा दीजिए।

विंडोज 7 में भी यह प्रोसेस इसी तरह होगा।

स्टेप 5 : करें इस्तेमाल
विंडोज एक्सपी में : Start - Settings - Network Settings पर जाकर My Network Places पर क्लिक करें। अब Entire Network पर क्लिक करें और फिर Microsoft Windows Network पर डबल क्लिक करें। अपने वर्कग्रुप के नाम पर डबल क्लिक करके देखिए, दूसरे कंप्यूटर का नाम दिखाई देगा।

विंडोज 7 मे : Start - Control Panel - Network and Internet पर जाकर Home Group पर क्लिक करें। आपके नेटवर्क में मौजूद दूसरा कंप्यूटर दिखाई देगा।

दूसरे कंप्यूटर के नाम पर क्लिक करके देखिए, उसमें आपका शेयर्ड फोल्डर दिखाई देगा और उसके भीतर पड़ी फाइलें भी। अब इस कंप्यूटर की फाइलें दूसरे कंप्यूटर पर access होने लगी हैं। इधर से फाइलें उधर कॉपी करके देखिए। क्यों आया न मजा? तो लीजिए बन गया आपका छोटा-सा होम नेटवर्क।

सिर्फ फाइलें और फोल्डर ही क्यों, अब आप एक कंप्यूटर से जुड़ी चीजों (मसलन डीवीडी ड्राइव, प्रिंटर, स्कैनर आदि) का भी दूसरे कंप्यूटर पर इस्तेमाल कर सकते हैं। बस उन्हें 'शेयर' भर करते जाना है।

What are Widgets ?

Posted By: Dharmendra Goyal - 11:22 pm


विजेट छोटे-छोटे ऐप्लिकेशंस , सॉफ्टवेयर प्रोग्राम्स हैं जो आपके कंप्यूटर की स्क्रीन पर रहते हुए छोटी-छोटी सेवाएं देने में सक्षम हैं। विंडोज विस्टा , विंडोज-7 जैसे कई आपरेटिंग सिस्टम्स के साथ कई विजेट्स खुद-ब-खुद इन्स्टॉल हो जाते हैं जिन्हें सिर्फ एक्टिव करने की जरूरत होती है। बाकी इंटरनेट से सर्च करके डाउनलोड किए जा सकते हैं। इंटरनेट से समाचारों की सुखिर्यां ढूंढकर आपके डेस्कटाप पर दिखाने वाले, आकर्षक अंदाज में समय दिखाने वाले, स्क्रीन पर इमेजेज का स्लाइड शो चलाने वाले, मौसम की सूचनाएं देने वाले, संगीत सुनाने वाले इंटरनेट सर्च की सुविधा देने वाले और ऐसे ही ढेरों विजेट्स सूचनाओं और सुविधाओं को आपके सामने लाकर रख देते हैं। इनमें से कुछ इंटरनेट से कनेक्टेड होते हैं तो कुछ आपके अपने कंप्यूटर से जुड़ी सूचनाओं को ही दिखाते हैं। विजेट्स की एक अलग कैटेगरी भी है जो वेबसाइटों पर इस्तेमाल किए जाते हैं।

भाषा अनुवादक : विश्व प्रसिद्ध

Posted By: Dharmendra Goyal - 10:56 am
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जानिए अपने पीसी का यूएसबी वर्जन

Posted By: Dharmendra Goyal - 9:16 pm
यदि आपने अपना पी सी 2001 से पहले लिया है तो आपका कंप्यूटर 1.1 USB वर्जन है इसके अलावा आप अपने कंप्यूटर का यूएसबी वर्जन पता करने के लिए My Computer पर जाकर राइट क्लिक करें और Properties पर जाएं। इसमें अगर सिस्टम प्रॉपर्टीज वाला आइकन नहीं आ रहा है तो अपने की-बोर्ड में Windows बटन के साथ Pause/Break की-पैड दबाएं । सिस्टम प्रॉपर्टीज के पेज पर जाकर Hardware  पर जाएं, फिर Device Manager पर क्लिक करें। इसमें Universal Serial Bus Controllers के नाम से एक आइकन दिखेगा जिस पर क्लिक करने पर यूएसबी की प्रॉपर्टी लिखी हुई आएगी। इसमें अगर Enhanced Host Controllers लिखा है या यूएसबी 2.0 लिखा है तो यह 2.0 होगा वरना 1.1 वर्जन होगा ।

टिप्स फॉर स्पीड अप यौर पीसी

Posted By: Dharmendra Goyal - 10:51 pm
जब आप कंप्यूटर को इंटरनेट के लिए यूज करते हैं तो वो काफी स्लो हो जाता है क्योंकि उसमें बहुत सी टेम्परेरी फाइल्स बन जाती है जिसके कारण डिस्क फ्रेगमेंटेशन यानी फाइल्स के छोटे-छोटे टुकड़े हार्ड डिस्क पर फैल जाते हैं। इसके अलावा जब आप बहुत से बीटा सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करते हैं तो ये रजिस्ट्री जो विंडोज का अपना डाटाबेस होते हैं उसमें कई एंट्रीज बना देता है। अनइंस्टॉल करने पर ये रजिस्ट्री से एंट्रीज डिलीट नहीं होती हैं जिससे रजिस्ट्री का साइज बढ़ जाता है उसके कारण जब भी सेंटिग आदि के लिए विंडोज डाटाबेस को पढ़ती है तो टाइम ज्यादा लगता है जिस कारण सॉफ्टवेयर और विंडोज लोड होने में भी ज्यादा टाइम लगता है। 
 
अपने कंप्यूटर को सही रखने के लिए अपने एंटी वायरस, एंटीस्पाईवेयर आदि को रेग्युलर अपडेट करते रहें। इसके अलावा अपने विंडोज को 'विंडोज अपडेट प्रोगाम' से रेग्युलर सेक्योरिटी अपडेट्स करते रहें। इसके लिए अपने कंप्यूटर में ' Start ' ' Settings ' ' Control Panel ' में जाकर 'Automatic Updates ' पर डबल क्लिक करके ' Automatic ' या फिर ' Download Updates For Me ' ऑप्शन को सिलेक्ट करें। ये अपडेट्स जेनुअन विंडोज में ही चल पाएंगे। इसके अलावा अपने ब्राउजर में टेम्परेरी इंटरनेट फाइल्स, कुकीज आदि को क्लीन करते रहें। 
इसके लिए 'Browser ' में जाएं फिर ' Menu Bar ' में ' Tools Option ' में जाकर ' Internet Options ' को सिलेक्ट करके Delete Temporary Files, History और Cookies को डिलीट कर दें। 
अगर आपके कंप्यूटर में वायरस है तो Avast, Avira, Quick Virus Remover को यूज कर सकते हैं। इसके अलावा आप इन स्टेप्स को रूटीन में फॉलो करें। 

1. Start-Run-Cleanmgr को चलाकर डिस्क क्लीन-अप कर लें। 

2. Cleanmgr चलाने के बाद Start-Run में dfrg.msc को चला लें और सी ड्राइव को सिलेक्ट करके डीफ्रेग्मेंट चला लें। 

पहले स्टेप से गैर टेम्परेरी और दूसरी गैर-जरूरी फाइल्स क्लीन हो जाएंगी और दूसरे स्टेप से डी-फ्रेग्मेंट करने से पूरी डिस्क पर फैले फाइल्स के छोटे-छोटे पार्ट्स एक जगह जमा हो जाएंगे जिससे डिस्क पर फाइल लिखने और पढ़ने की स्पीड बढ़ जाएगी।

बेसिक्स ऑफ ई मेल पासवर्ड

Posted By: Dharmendra Goyal - 10:30 pm
पासवर्ड बनाने का मौका आया तो आपने झट से डाल दिया 'ललित' जो आपके बेटे का नाम है, क्योंकि उसमें अंक भी होने चाहिए तो आपने लिख दिया 'ललित 2003' जो ललित के जन्म का साल है। लेकिन क्या यह ऐसा पासवर्ड है जिसके भरोसे पर आप अपने पर्सनल डाक्यूमेंट और मैसेज की सेफ्टी को लेकर बेफ्रिक हो सकें? कोई दोस्त अनुमान लगाने बैठेगा तो आठ-दस प्रयास के बाद इसका पता लगा ही लेगा! खुद अपना, अपने पार्टनर, बच्चों आदि के नाम या गाड़ी, टेलीफोन के नंबर, जन्म के साल आदि को पासवर्ड बनाना बिना पासवर्ड के काम चलाने जैसा ही है। यही बात '12345' 'ABCDE' 'XYD' जैसे पासवर्ड पर भी लागू होती है। अपने कंप्यूटर, ई-मेल, बैंक खाते आदि को सेफ रखना चाहते हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखें : 
 
पासवर्ड ऐसा होना चाहिए जो किसी भी डिक्शनरी में न मिले। धोखेबाज उन्हें ढूंढने के लिए कुछ ऐसे सॉफ्टवेयर को यूज करते हैं जो बहुत तेजी से हजारों किस्म के कॉम्बीनेशंस को आजमाकर देख लेते हैं। वे वर्णमाला के अक्षरों, अंकों आदि से शुरू करके पूरी-की-पूरी डिक्शनरी को आजमा लेते हैं। 

अगर आपका पासवर्ड 'ABC' है तो उसे ढूंढने में सॉफ्टवेयर को सिर्फ छह कॉम्बीनेशंस आजमाने पड़ेंगे। अगर वह 'ABC123' है तो उसे 720 बार प्रयास करना पड़ेगा और 'ABC1234' के लिए यह संख्या छह हजार से ज्यादा होगी। आप के लिए छह हजार बार प्रयास करना भले ही मुश्किल हो लेकिन कंप्यूटर के लिए यह सैकंडों का खेल है। 

पासवर्ड जितना बड़ा और मुश्किल होगा, उतना ही अच्छा रहेगा। 14 अक्षरों का पासवर्ड बहुत सेफ माना जाता है। कोशिश करें कि इसमें कैपिटल और स्मॉल लैटर, अंक, स्पेशल कैरेक्टर्स (@!&%{-$ आदि) भी हों। आप चाहें तो इसके लिए maord.com और strongpasswordgenerator.com जैसे ऑनलाइन पासवर्ड जेनरेटर्स की मदद भी ले सकते हैं। 

पासवर्ड को कहीं भी लिखकर न रखें। अगर आप कई पासवर्ड यूज करते हैं और आपके लिए उन्हें याद रखना मुश्किल है तो कीपास (keepass.info) जैसे फ्री सॉफ्टवेयर को यूज करें जो उन्हें एनक्रिप्ट करके सेफ रखता है। 

अपने पासवर्ड को महीने में एक बार जरूर बदल लें। अगर पूरी तरह बदलना आसान न लगे तो कम-से-कम उनमें हर बार एक-दो अक्षर या अंक जरूर जोड़ लें या बदल दें। 

अपने सभी अकाउंट्स के लिए एक ही पासवर्ड यूज न करें। अगर वह लीक हुआ तो कहीं भी, कुछ भी सीक्रेट नहीं बचेगा। सब अकाउंट्स में अलग पासवर्ड का मतलब है, सबकी अलग-अलग सेफ्टी। 

दूसरों के कंप्यूटरों पर (साइबर कैफे आदि में) बैठें तो ध्यान रखें कि ई-मेल अकाउंट या ब्राउजर में 'stay signed in' जैसी कोई सैटिंग तो नहीं है। वरना आपके हटते ही कोई आपकी मेल पढ़ रहा होगा। काम पूरा होने पर वेब पेज को 'sign out' करना न भूलें। संभव हो तो tools मेन्यू में 'internet options' पर जाकर 'browsing history' में जाकर 'delete' कर दें। 

अपना पासवर्ड किसी को न बताएं। अगर ऐसा करना बहुत जरूरी हो तो काम पूरा होते ही उसे बदल दें। भूले हुए पासवर्ड को ई-मेल से मंगवाया है तो नया पासवर्ड आते ही उसे बदल दें।

ऐसा पीसी -जो न तो एक कंपलीट कंप्यूटर है, न फोन है और न ही नेटबुक

Posted By: Dharmendra Goyal - 11:23 pm
गैजट की दुनिया में सबसे बड़ा इंतजार खत्म हो गया है। आई पॉड और आई फोन बनाने वाली कंपनी ऐपल ने अपना नया चमत्कार दुनिया के सामने पेश कर दिया है, जिसका नाम है आई पैड... 10 इंच की टचस्क्रीन वाला टैबलेट पीसी -जो न तो एक कंपलीट कंप्यूटर है, न फोन है और न ही नेटबुक है। लेकिन इसमें इतना दम है कि कई गैजट्स को यह खत्म कर सकता है। जलवा ऐसा कि यह लोगों में किताबें और अखबार पढ़ने की आदत डाल दे, टीवी देखने और गेमिंग का अंदाज बदल दे और सबसे बड़ी बात कि गैजट्स की एक नई कैटिगरी बना सकता है। ऐपल ने इसकी प्राइस रेंज महज 500 डॉलर (करीब 25,000 रुपये) से शुरू की है।  
आई पैड के फीचर 
  • 9.7 इंच की एलईडी स्क्रीन, मल्टीटच 
  • 1.5 पाउंड वजन, 0.5 इंच मोटाई 1 गीगाहर्त्ज ऐपल ए-4 प्रॉसेसर 
  • आई ट्यूंस, सफारी ब्राउजर, ई-मेल, मीडिया प्लेयर 
  • आई-ऑफिस, आई-बुक्स, गेम्स 
  • 10 घंटे की बैटरी लाइफ, 1 महीने का स्टैंडबाई 
  • ब्लू टूथ, वाई फाई, 3 जी, स्टोरेज 16, 32 और 64 जीबी
आई पैड आखिर है क्या: 
  • यह एक ऐसा कंप्यूटर है जिसे आप इंटरनेट सर्फिंग, ई-मेल चेक करने के लिए इस्तेमाल करेंगे। इस पर आप अखबारों और किताबों के ई-पेपर वर्जन पढ़ सकेंगे, म्यूजिक सुनने और गेम खेलने के लिए आई पैड इस्तेमाल होगा और विडियो देखने का फीचर भी इसमें है। इसमें फोन नहीं है। यह आपका अकले कंप्यूटर नहीं बल्कि सेकंडरी कंप्यूटर हो सकता है। 
सबसे बड़ी बात: 
  • आई पैड कॉटेंट जनरेट करने वाला कंप्यूटर नहीं बल्कि कॉटेंट को इस्तेमाल करने वाला टैबलेट टचस्क्रीन कंप्यूटर है। टाइप करने के लिए इसकी स्क्रीन पर वर्चुअल की बोड आ जाएगा। आई पैड 9.7 इंच की एलईडी स्क्रीन वाली डिवाइस है, जिसे टैबलेट पीसी कहते हैं। 
आई पैड के दो वर्जन है : 
  • वाई-फाई वाला और वाई फाई के साथ 3जी वाला। ऐपल के सीईओ स्टीव जॉब्स ने इसे सैन फ्रैंसिस्को में दुनिया के सामने पेश किया। इसका इंतजार इतना ज्यादा था कि लॉन्च के वक्त दुनियाभर में इंटरनेट की स्पीड स्लो हो गई, ट्विटर पर लॉन्च के एक घंटे में 1.77 लाख पोस्ट दर्ज की गईं, यानी हर मिनट में करीब 300 पोस्ट। यह एक रेकॉर्ड है और साबित करता है कि टॉप सीक्रेट रखे गए आई पैड के बारे में जानने की कितनी ज्यादा बेचैनी दुनियाभर में थी। 
इंतजार का फल कैसा रहा? 
  • टेक्नॉलजी एक्सपर्ट निमिष दुबे कहते हैं कि महज 500 डॉलर प्राइस बहुत बड़ा फैक्टर है। ऐपल ने अब तक सिर्फ आई पॉड को आम लोगों के बजट में रखा था, आई फोन हो या मैक कंप्यूटर रेंज - वे बेहद महंगे थे। आई पैड पब्लिक का गैजट बनेगा। निमिष मानते हैं कि आई पैड में इतना दम है कि वह नेटबुक को खत्म कर सकता है, किंडल जैसे ई-बुक रीडर का बचना भी मुश्किल होगा। अब तक गिने चुने टैबलेट पीसी थे, वे भी 30-40 हजार की रेंज में। हालांकि साउंड के लिए मोनो आउटपुट निराश करता है और कंप्यूटिंग के दौरान मल्टी टास्किंग का फीचर तो ऐपल को कम से कम देना चाहिए था। 
गैजट एक्सपर्ट का मानना है कि 
  • प्राइस तो कम है लेकिन देखना होगा कि यह किस काम आएगा। उनके मुताबिक अब तक हम जो कंप्यूटिंग करते रहे हैं वह क्रिएशन के लिए थी, जिसमें हम कुछ कंटेंट जेनरेट करते हैं, लेकिन आई पैड का फंडा कंटेंट को कन्जयूम करने का है। वह कहते हैं कि जब इसमें सभी न्यूज पेपर के सब्सिक्रिप्शन आ जाएगा, मैगजीन आ जाएंगी, गेमिंग होगी तो यह एक नई प्रॉडक्ट कैटिगरी को जन्म देगा। वह कहते हैं कि आई पैड नया कॉन्सेप्ट है जो हमारी आदतों को बदल भी सकता है और नहीं भी। यह कामयाब रहा तो नेटबुक, ई-बुक म्यूजिक पोर्टेबल डिवाइस जैसे तमाम गैजट खत्म हो जाएंगे, लेकिन... और यह लेकिन बहुत बड़ा सवाल है। 

हिंदी में उपयोगी शब्दावली

Posted By: Dharmendra Goyal - 10:48 pm
हिंदी Computer Survival Guide
Home : मुखप्रष्ठ   

Copy : प्रतिलिपी
Cut : कांटे
Paste : चिपकाये 
Bold : बोल्ड
Italic : इटालिक
Underline : रेखांकित
Font : फॉण्ट
Font Size : फॉण्ट आकार
Filter : छाने
Sort A to Z : अ से ज तक संयोजित
Cell : कक्ष
Format Painter : डान्चे को यथावत डाले
Fill : भरे
Borders : सीमाए

इंटरनेट से मिल सकती है डिप्रेशन से लड़ने में मदद

Posted By: Dharmendra Goyal - 12:33 am
एक स्टडी में कहा गया है कि टीनएजर्स को डिप्रेशन से लड़ने में इंटरनेट से काफी मदद मिल सकती है। यह स्टडी सिडनी यूनिवर्सिटी में भारतीय मूल के रिसर्चर डॉक्टर सुवेना सेठी और उनके सहयोगियों ने की। 

स्टडी में उन्होंने पाया कि टीएनएजर्स की मेंटल हेल्थ को सुधारने में इंटरेक्टिव ऑनलाइन मेंटल हेल्थ रिसोर्सेज और टे्रडिशनल काउंसलिंग मददगार साबित हो सकती है। स्टडी रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में रह रहे कम उम्र के लोगों को हल्के और मध्यम स्तर के डिप्रेशन से निपटने में इंटरनेट से मदद मिल सकती है। इस काम में ऑनलाइन मेंटल हेल्थ रिसोर्स (स्टैटिक और इंटरेक्टिव) असरदार साबित हो सकते हैं। 
'सेल्फ-हेल्प फॉर डिप्रेशन' नाम की इस स्टडी में मौजूदा ऑनलाइन मेंटल हेल्थ रिसोर्स का मूल्यांकन किया गया है, ताकि इसका इलाज के विभिन्न तरीकों में इस्तेमाल किया जा सके। स्टडी टीम मेंबर डॉक्टर एंड्र्यू कैंपबेल ने कहा- हल्के और मध्यम स्तर के डिप्रेशन से बचाव और इसके मैनेजमेंट के लिए हर इनोवेटिव ऑनलाइन अप्रोच को दुनिया भर में आजमाया जा रहा है। इस स्टडी की रिपोर्ट 'जर्नल ऑफ टेक्नॉलजी इन ह्यूमन सर्विसेज' में प्रकाशित हुई है। एंड्रू कैंपबेल ने कहा कि हमारे रिसर्च के मुताबिक टीनएजर्स के लिए डिप्रेशन ट्रीटमेंट का बेस्ट तरीका ऑफलाइन काउंसलिंग के साथ-साथ ऑनलाइन सेल्फ हेल्प टूल्स का इस्तेमाल है।

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