How to Learn Computer in Hindi

How to Learn Computer in Hindi
आप कंप्यूटर सीखना तो चाहते है लेकिन हिंदी में नेट पे बहुत कम लेख उपलब्ध होने के कारण सीख नहीं पा रहे है तो.....

भाषा अनुवादक : विश्व प्रसिद्ध

Posted By: Dharmendra Goyal - 10:56 am
 यदि आप एक ऐसे भाषा अनुवादक कि खोज कर रहे है जो आपके लिए बिना किसी त्रुटी के आपकी इच्छित भाषा का सही सही रूपांतरण किसी अन्य भाषा में करके इसकी व्याकरण सम्बंधित अशुद्धियों को भी दूर कर सके तो आपकी खोज अब समाप्त हो गयी है 
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जानिए अपने पीसी का यूएसबी वर्जन

Posted By: Dharmendra Goyal - 9:16 pm
यदि आपने अपना पी सी 2001 से पहले लिया है तो आपका कंप्यूटर 1.1 USB वर्जन है इसके अलावा आप अपने कंप्यूटर का यूएसबी वर्जन पता करने के लिए My Computer पर जाकर राइट क्लिक करें और Properties पर जाएं। इसमें अगर सिस्टम प्रॉपर्टीज वाला आइकन नहीं आ रहा है तो अपने की-बोर्ड में Windows बटन के साथ Pause/Break की-पैड दबाएं । सिस्टम प्रॉपर्टीज के पेज पर जाकर Hardware  पर जाएं, फिर Device Manager पर क्लिक करें। इसमें Universal Serial Bus Controllers के नाम से एक आइकन दिखेगा जिस पर क्लिक करने पर यूएसबी की प्रॉपर्टी लिखी हुई आएगी। इसमें अगर Enhanced Host Controllers लिखा है या यूएसबी 2.0 लिखा है तो यह 2.0 होगा वरना 1.1 वर्जन होगा ।

टिप्स फॉर स्पीड अप यौर पीसी

Posted By: Dharmendra Goyal - 10:51 pm
जब आप कंप्यूटर को इंटरनेट के लिए यूज करते हैं तो वो काफी स्लो हो जाता है क्योंकि उसमें बहुत सी टेम्परेरी फाइल्स बन जाती है जिसके कारण डिस्क फ्रेगमेंटेशन यानी फाइल्स के छोटे-छोटे टुकड़े हार्ड डिस्क पर फैल जाते हैं। इसके अलावा जब आप बहुत से बीटा सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करते हैं तो ये रजिस्ट्री जो विंडोज का अपना डाटाबेस होते हैं उसमें कई एंट्रीज बना देता है। अनइंस्टॉल करने पर ये रजिस्ट्री से एंट्रीज डिलीट नहीं होती हैं जिससे रजिस्ट्री का साइज बढ़ जाता है उसके कारण जब भी सेंटिग आदि के लिए विंडोज डाटाबेस को पढ़ती है तो टाइम ज्यादा लगता है जिस कारण सॉफ्टवेयर और विंडोज लोड होने में भी ज्यादा टाइम लगता है। 
 
अपने कंप्यूटर को सही रखने के लिए अपने एंटी वायरस, एंटीस्पाईवेयर आदि को रेग्युलर अपडेट करते रहें। इसके अलावा अपने विंडोज को 'विंडोज अपडेट प्रोगाम' से रेग्युलर सेक्योरिटी अपडेट्स करते रहें। इसके लिए अपने कंप्यूटर में ' Start ' ' Settings ' ' Control Panel ' में जाकर 'Automatic Updates ' पर डबल क्लिक करके ' Automatic ' या फिर ' Download Updates For Me ' ऑप्शन को सिलेक्ट करें। ये अपडेट्स जेनुअन विंडोज में ही चल पाएंगे। इसके अलावा अपने ब्राउजर में टेम्परेरी इंटरनेट फाइल्स, कुकीज आदि को क्लीन करते रहें। 
इसके लिए 'Browser ' में जाएं फिर ' Menu Bar ' में ' Tools Option ' में जाकर ' Internet Options ' को सिलेक्ट करके Delete Temporary Files, History और Cookies को डिलीट कर दें। 
अगर आपके कंप्यूटर में वायरस है तो Avast, Avira, Quick Virus Remover को यूज कर सकते हैं। इसके अलावा आप इन स्टेप्स को रूटीन में फॉलो करें। 

1. Start-Run-Cleanmgr को चलाकर डिस्क क्लीन-अप कर लें। 

2. Cleanmgr चलाने के बाद Start-Run में dfrg.msc को चला लें और सी ड्राइव को सिलेक्ट करके डीफ्रेग्मेंट चला लें। 

पहले स्टेप से गैर टेम्परेरी और दूसरी गैर-जरूरी फाइल्स क्लीन हो जाएंगी और दूसरे स्टेप से डी-फ्रेग्मेंट करने से पूरी डिस्क पर फैले फाइल्स के छोटे-छोटे पार्ट्स एक जगह जमा हो जाएंगे जिससे डिस्क पर फाइल लिखने और पढ़ने की स्पीड बढ़ जाएगी।

बेसिक्स ऑफ ई मेल पासवर्ड

Posted By: Dharmendra Goyal - 10:30 pm
पासवर्ड बनाने का मौका आया तो आपने झट से डाल दिया 'ललित' जो आपके बेटे का नाम है, क्योंकि उसमें अंक भी होने चाहिए तो आपने लिख दिया 'ललित 2003' जो ललित के जन्म का साल है। लेकिन क्या यह ऐसा पासवर्ड है जिसके भरोसे पर आप अपने पर्सनल डाक्यूमेंट और मैसेज की सेफ्टी को लेकर बेफ्रिक हो सकें? कोई दोस्त अनुमान लगाने बैठेगा तो आठ-दस प्रयास के बाद इसका पता लगा ही लेगा! खुद अपना, अपने पार्टनर, बच्चों आदि के नाम या गाड़ी, टेलीफोन के नंबर, जन्म के साल आदि को पासवर्ड बनाना बिना पासवर्ड के काम चलाने जैसा ही है। यही बात '12345' 'ABCDE' 'XYD' जैसे पासवर्ड पर भी लागू होती है। अपने कंप्यूटर, ई-मेल, बैंक खाते आदि को सेफ रखना चाहते हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखें : 
 
पासवर्ड ऐसा होना चाहिए जो किसी भी डिक्शनरी में न मिले। धोखेबाज उन्हें ढूंढने के लिए कुछ ऐसे सॉफ्टवेयर को यूज करते हैं जो बहुत तेजी से हजारों किस्म के कॉम्बीनेशंस को आजमाकर देख लेते हैं। वे वर्णमाला के अक्षरों, अंकों आदि से शुरू करके पूरी-की-पूरी डिक्शनरी को आजमा लेते हैं। 

अगर आपका पासवर्ड 'ABC' है तो उसे ढूंढने में सॉफ्टवेयर को सिर्फ छह कॉम्बीनेशंस आजमाने पड़ेंगे। अगर वह 'ABC123' है तो उसे 720 बार प्रयास करना पड़ेगा और 'ABC1234' के लिए यह संख्या छह हजार से ज्यादा होगी। आप के लिए छह हजार बार प्रयास करना भले ही मुश्किल हो लेकिन कंप्यूटर के लिए यह सैकंडों का खेल है। 

पासवर्ड जितना बड़ा और मुश्किल होगा, उतना ही अच्छा रहेगा। 14 अक्षरों का पासवर्ड बहुत सेफ माना जाता है। कोशिश करें कि इसमें कैपिटल और स्मॉल लैटर, अंक, स्पेशल कैरेक्टर्स (@!&%{-$ आदि) भी हों। आप चाहें तो इसके लिए maord.com और strongpasswordgenerator.com जैसे ऑनलाइन पासवर्ड जेनरेटर्स की मदद भी ले सकते हैं। 

पासवर्ड को कहीं भी लिखकर न रखें। अगर आप कई पासवर्ड यूज करते हैं और आपके लिए उन्हें याद रखना मुश्किल है तो कीपास (keepass.info) जैसे फ्री सॉफ्टवेयर को यूज करें जो उन्हें एनक्रिप्ट करके सेफ रखता है। 

अपने पासवर्ड को महीने में एक बार जरूर बदल लें। अगर पूरी तरह बदलना आसान न लगे तो कम-से-कम उनमें हर बार एक-दो अक्षर या अंक जरूर जोड़ लें या बदल दें। 

अपने सभी अकाउंट्स के लिए एक ही पासवर्ड यूज न करें। अगर वह लीक हुआ तो कहीं भी, कुछ भी सीक्रेट नहीं बचेगा। सब अकाउंट्स में अलग पासवर्ड का मतलब है, सबकी अलग-अलग सेफ्टी। 

दूसरों के कंप्यूटरों पर (साइबर कैफे आदि में) बैठें तो ध्यान रखें कि ई-मेल अकाउंट या ब्राउजर में 'stay signed in' जैसी कोई सैटिंग तो नहीं है। वरना आपके हटते ही कोई आपकी मेल पढ़ रहा होगा। काम पूरा होने पर वेब पेज को 'sign out' करना न भूलें। संभव हो तो tools मेन्यू में 'internet options' पर जाकर 'browsing history' में जाकर 'delete' कर दें। 

अपना पासवर्ड किसी को न बताएं। अगर ऐसा करना बहुत जरूरी हो तो काम पूरा होते ही उसे बदल दें। भूले हुए पासवर्ड को ई-मेल से मंगवाया है तो नया पासवर्ड आते ही उसे बदल दें।

ऐसा पीसी -जो न तो एक कंपलीट कंप्यूटर है, न फोन है और न ही नेटबुक

Posted By: Dharmendra Goyal - 11:23 pm
गैजट की दुनिया में सबसे बड़ा इंतजार खत्म हो गया है। आई पॉड और आई फोन बनाने वाली कंपनी ऐपल ने अपना नया चमत्कार दुनिया के सामने पेश कर दिया है, जिसका नाम है आई पैड... 10 इंच की टचस्क्रीन वाला टैबलेट पीसी -जो न तो एक कंपलीट कंप्यूटर है, न फोन है और न ही नेटबुक है। लेकिन इसमें इतना दम है कि कई गैजट्स को यह खत्म कर सकता है। जलवा ऐसा कि यह लोगों में किताबें और अखबार पढ़ने की आदत डाल दे, टीवी देखने और गेमिंग का अंदाज बदल दे और सबसे बड़ी बात कि गैजट्स की एक नई कैटिगरी बना सकता है। ऐपल ने इसकी प्राइस रेंज महज 500 डॉलर (करीब 25,000 रुपये) से शुरू की है।  
आई पैड के फीचर 
  • 9.7 इंच की एलईडी स्क्रीन, मल्टीटच 
  • 1.5 पाउंड वजन, 0.5 इंच मोटाई 1 गीगाहर्त्ज ऐपल ए-4 प्रॉसेसर 
  • आई ट्यूंस, सफारी ब्राउजर, ई-मेल, मीडिया प्लेयर 
  • आई-ऑफिस, आई-बुक्स, गेम्स 
  • 10 घंटे की बैटरी लाइफ, 1 महीने का स्टैंडबाई 
  • ब्लू टूथ, वाई फाई, 3 जी, स्टोरेज 16, 32 और 64 जीबी
आई पैड आखिर है क्या: 
  • यह एक ऐसा कंप्यूटर है जिसे आप इंटरनेट सर्फिंग, ई-मेल चेक करने के लिए इस्तेमाल करेंगे। इस पर आप अखबारों और किताबों के ई-पेपर वर्जन पढ़ सकेंगे, म्यूजिक सुनने और गेम खेलने के लिए आई पैड इस्तेमाल होगा और विडियो देखने का फीचर भी इसमें है। इसमें फोन नहीं है। यह आपका अकले कंप्यूटर नहीं बल्कि सेकंडरी कंप्यूटर हो सकता है। 
सबसे बड़ी बात: 
  • आई पैड कॉटेंट जनरेट करने वाला कंप्यूटर नहीं बल्कि कॉटेंट को इस्तेमाल करने वाला टैबलेट टचस्क्रीन कंप्यूटर है। टाइप करने के लिए इसकी स्क्रीन पर वर्चुअल की बोड आ जाएगा। आई पैड 9.7 इंच की एलईडी स्क्रीन वाली डिवाइस है, जिसे टैबलेट पीसी कहते हैं। 
आई पैड के दो वर्जन है : 
  • वाई-फाई वाला और वाई फाई के साथ 3जी वाला। ऐपल के सीईओ स्टीव जॉब्स ने इसे सैन फ्रैंसिस्को में दुनिया के सामने पेश किया। इसका इंतजार इतना ज्यादा था कि लॉन्च के वक्त दुनियाभर में इंटरनेट की स्पीड स्लो हो गई, ट्विटर पर लॉन्च के एक घंटे में 1.77 लाख पोस्ट दर्ज की गईं, यानी हर मिनट में करीब 300 पोस्ट। यह एक रेकॉर्ड है और साबित करता है कि टॉप सीक्रेट रखे गए आई पैड के बारे में जानने की कितनी ज्यादा बेचैनी दुनियाभर में थी। 
इंतजार का फल कैसा रहा? 
  • टेक्नॉलजी एक्सपर्ट निमिष दुबे कहते हैं कि महज 500 डॉलर प्राइस बहुत बड़ा फैक्टर है। ऐपल ने अब तक सिर्फ आई पॉड को आम लोगों के बजट में रखा था, आई फोन हो या मैक कंप्यूटर रेंज - वे बेहद महंगे थे। आई पैड पब्लिक का गैजट बनेगा। निमिष मानते हैं कि आई पैड में इतना दम है कि वह नेटबुक को खत्म कर सकता है, किंडल जैसे ई-बुक रीडर का बचना भी मुश्किल होगा। अब तक गिने चुने टैबलेट पीसी थे, वे भी 30-40 हजार की रेंज में। हालांकि साउंड के लिए मोनो आउटपुट निराश करता है और कंप्यूटिंग के दौरान मल्टी टास्किंग का फीचर तो ऐपल को कम से कम देना चाहिए था। 
गैजट एक्सपर्ट का मानना है कि 
  • प्राइस तो कम है लेकिन देखना होगा कि यह किस काम आएगा। उनके मुताबिक अब तक हम जो कंप्यूटिंग करते रहे हैं वह क्रिएशन के लिए थी, जिसमें हम कुछ कंटेंट जेनरेट करते हैं, लेकिन आई पैड का फंडा कंटेंट को कन्जयूम करने का है। वह कहते हैं कि जब इसमें सभी न्यूज पेपर के सब्सिक्रिप्शन आ जाएगा, मैगजीन आ जाएंगी, गेमिंग होगी तो यह एक नई प्रॉडक्ट कैटिगरी को जन्म देगा। वह कहते हैं कि आई पैड नया कॉन्सेप्ट है जो हमारी आदतों को बदल भी सकता है और नहीं भी। यह कामयाब रहा तो नेटबुक, ई-बुक म्यूजिक पोर्टेबल डिवाइस जैसे तमाम गैजट खत्म हो जाएंगे, लेकिन... और यह लेकिन बहुत बड़ा सवाल है। 

हिंदी में उपयोगी शब्दावली

Posted By: Dharmendra Goyal - 10:48 pm
हिंदी Computer Survival Guide
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इंटरनेट से मिल सकती है डिप्रेशन से लड़ने में मदद

Posted By: Dharmendra Goyal - 12:33 am
एक स्टडी में कहा गया है कि टीनएजर्स को डिप्रेशन से लड़ने में इंटरनेट से काफी मदद मिल सकती है। यह स्टडी सिडनी यूनिवर्सिटी में भारतीय मूल के रिसर्चर डॉक्टर सुवेना सेठी और उनके सहयोगियों ने की। 

स्टडी में उन्होंने पाया कि टीएनएजर्स की मेंटल हेल्थ को सुधारने में इंटरेक्टिव ऑनलाइन मेंटल हेल्थ रिसोर्सेज और टे्रडिशनल काउंसलिंग मददगार साबित हो सकती है। स्टडी रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में रह रहे कम उम्र के लोगों को हल्के और मध्यम स्तर के डिप्रेशन से निपटने में इंटरनेट से मदद मिल सकती है। इस काम में ऑनलाइन मेंटल हेल्थ रिसोर्स (स्टैटिक और इंटरेक्टिव) असरदार साबित हो सकते हैं। 
'सेल्फ-हेल्प फॉर डिप्रेशन' नाम की इस स्टडी में मौजूदा ऑनलाइन मेंटल हेल्थ रिसोर्स का मूल्यांकन किया गया है, ताकि इसका इलाज के विभिन्न तरीकों में इस्तेमाल किया जा सके। स्टडी टीम मेंबर डॉक्टर एंड्र्यू कैंपबेल ने कहा- हल्के और मध्यम स्तर के डिप्रेशन से बचाव और इसके मैनेजमेंट के लिए हर इनोवेटिव ऑनलाइन अप्रोच को दुनिया भर में आजमाया जा रहा है। इस स्टडी की रिपोर्ट 'जर्नल ऑफ टेक्नॉलजी इन ह्यूमन सर्विसेज' में प्रकाशित हुई है। एंड्रू कैंपबेल ने कहा कि हमारे रिसर्च के मुताबिक टीनएजर्स के लिए डिप्रेशन ट्रीटमेंट का बेस्ट तरीका ऑफलाइन काउंसलिंग के साथ-साथ ऑनलाइन सेल्फ हेल्प टूल्स का इस्तेमाल है।

इंटरनेट की बेहतर स्पीड ?

Posted By: Dharmendra Goyal - 12:02 am
इंटरनेट की स्पीड कई चीजों पर निर्भर करती है। मसलन आपके कंप्यूटर की स्पीड, मॉडम/राउटर और कंप्यूटर के बीच कनेक्शन की स्पीड और मॉडम/राउटर से आईएसपी तक की स्पीड। आपको यह बात समझ लेनी चाहिए कि इन तीनों में से जो स्पीड सबसे कम होगी, आपको अपने इंटरनेट पर वही स्पीड मिलेगी। चूंकि आप मॉडम के तौर पर मोबाइल का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए ऐसा मान सकते हैं कि आप जीपीआरएस का यूज कर रहे होंगे। हम यह भी मानकर चल रहे हैं कि आपके पास एक अच्छा कंप्यूटर है, जिसमें भरपूर रैम है। इसके अलावा आपके पास एक अच्छा प्रॉसेसर है, जिसकी हार्ड डिस्क में 5 से 7 जीबी का फ्री स्पेस है। 

अगर आप यूएसबी केबल के जरिए कंप्यूटर को मोबाइल से कनेक्ट करते हैं, तो कंप्यूटर और मोबाइल के बीच डेटा 300 से 400 मेगा बिट्स प्रति सेकंड की दर से ट्रांसफर होगा। ब्लूटुथ कनेक्शन की स्पीड करीब 3 मेगाबिट्स प्रति सेकंड है, जबकि जीपीआरएस कनेक्शन 50 किलोबाइट की दर से डेटा ट्रांसफर कर सकता है, जो ब्लूटुथ कनेक्शन के मुकाबले काफी कम है। यहां यह भी साफ है कि यूएसबी केबल ब्लूटुथ के मुकाबले 100 गुना तेज स्पीड दे सकता है। चूंकि कम स्पीड जीपीआरएस की वजह से है इसलिए इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप केबल कनेक्शन का यूज कर रहे हैं या ब्लूटुथ कनेक्शन का, इंटरनेट आपको तब तक वही स्पीड देता रहेगा, जब तक आप 3जी कनेक्शन या किसी ऐसे मोबाइल कनेक्शन का यूज नहीं करते, जो अच्छी स्पीड देता हो।

How to Assemble एंट्री लेवल गेमिंग पीसी

Posted By: Dharmendra Goyal - 11:34 pm
आपके सभी मल्टिमीडिया ऐप्लिकेशन और गेमिग के लिए यह जरूरी है कि आपको आपके पैसे की सही कीमत मिले। आप अपने बजट में एंट्री लेवल गेमिंग पीसी असेम्बल करा सकते हैं। 


सीपीयू
सभी एंट्री लेवल गेमिंग पीसी के लिए एएमडी एथलॉन सीपीयू काफी अच्छा है क्योंकि इतने प्राइज में इनटेल में कोई सीपीयू उपलब्ध नहीं है। 
  • एएमडी एथलॉन II X3 435 (2.9 GHz) - 3700 रुपये 
मदरबोर्ड 
7.1 ऑडियो के साथ यह बोर्ड DDR3 RAM को स्पोर्ट करता है। इन सब खूबियों के कारण ही इसको सलेक्ट किया गया है। 
  • MSI 785G-E51 या इसके बराबर - 4,200 रुपये 
रैम 
यह गेमिंग के लिए उपलब्ध सबसे बेहतर पार्ट्स है, साथ ही यह पीसी में गेमिंग के लिए जरूरी है। 
  • 1333 Mhz DDR3 2GB (दो पीस) - 5400 रुपये 
हार्ड डिस्क 
  • सीगेट बाराकुडा हार्डडिस्क 1 TB 7200.12- 3,300 रुपये 
  • आप इसमें वेस्टर्न डिजिटल हार्ड डिस्क भी ले सकते हैं। 
गेमिंग कार्ड  
  • जीफोर्स nvidia GTS 250, 512MB DDR3 के साथ - 5900 रुपये 
  • MSI कार्ड या इसी के जैसा कोई कार्ड लें। यह किसी भी गेमिंग पीसी के लिए जरूरी है। 
मॉनिटर 
  • एलजी या डेल - 6,500-10,000 रुपये (depends on Size)
डीवीडी राइटर
  • एलजी या सैमसंग का साटा डीवीडी राइटर - 1,000-1500 रुपये 
कैबिनेट 
  • कूलमास्टर एलीट ब्रैंडेड एसएमपीएस के साथ - 3700 रुपये 
की-बोर्ड और माउस
  • माइक्रोसॉफ्ट या लॉगीटेक के यूएसबी की-बोर्ड और माउस - 750 रुपये 
स्पीकर्स 
  • लॉजिटेक या क्रिएटिव 2.1 स्पीकर्स 35650 - 1,500 रुपये

मॉनिटर से आजाद हुआ कंप्यूटर : Microsoft & Others

Posted By: Dharmendra Goyal - 11:09 pm



अगर आप किसी होटल या दफ्तर में लोगों को टेबल की चमचमाती सतह पर इधर-उधर उंगलियां चलाते देखें तो चौंकें नहीं। दरअसल यह टेबल एक खास तरह का कंप्यूटर है, जिसे 'माइक्रोसॉफ्ट सरफेस' कहा जाता है। इसके अंदर पूरा-का-पूरा ऑपरेटिंग सिस्टम मौजूद है और उसकी ऊपरी सतह पर ठीक वैसी ही स्क्रीन है, जैसी आपके मॉनिटर में होती है। 

'सरफेस' घिसे-पिटे और पुराने डिजाइनों की गुलामी से आजाद होने की कंप्यूटर की छटपटाहट का नतीजा है। आखिर क्यों कंप्यूटर सिर्फ चार चौकोर दीवारों के भीतर सिमटा रहे? ऐसे और भी कई प्रयोग हुए हैं जिनमें कंप्यूटर को ज्यादा दिलचस्प, ज्यादा आकर्षक और यूजर की जरूरतों के अधिक अनुकूल बनाने की कोशिश की गई है। 



माइक्रोसॉफ्ट सरफेस : 

टेबल जैसे इस कंप्यूटर में आई-फोन में इस्तेमाल होने वाली मल्टी-टच तकनीक है। उसकी स्क्रीन पर मौजूद आइकंस को उंगलियों से दबाने पर एप्लिकेशन खुल जाते है। इसके अलावा, आप किसी भी फाइल के आइकन को ड्रैग करके दूसरी जगह पर ले जा सकते हैं। आम कंप्यूटर में माउस को सिर्फ एक ही जगह पर क्लिक किया जा सकता है, जबकि इसमें 30 इंच लंबे 'सरफेस' की स्क्रीन को अनेक जगहों पर एक साथ छूकर कमांड्स दी जा सकती हैं। यह मल्टी-टच है और इसे एक साथ बहुत से लोग यूज कर सकते हैं। स्क्रीन पर कैमरा रखकर उसके फोटोग्राफ कंप्यूटर में ट्रांसफर किए जा सकते हैं। यह म्यूजिक प्लेयर और मोबाइल फोन जैसी बाकी डिजिटल तकनीकों को भी पहचानता है, जिन्हें सरफेस पर रखकर कंप्यूटर से कनेक्ट किया जा सकता है। सरफेस की कीमत करीब 12 हजार डॉलर (6 लाख रुपये) है।
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यूनो पीसी : 
कॉफी मग के आकार वाले इस कंप्यूटर में सचमुच कॉफी भी पी जा सकती है। मग की बाहरी दीवारों पर वह सब मौजूद है, जो आम कंप्यूटरों में होता है। खूबसूरत-सी दिखने वाली स्क्रीन पर फैले ईमेल, स्टॉक मार्केट अपडेट्स, खबरें, टाइम, ट्रैफिक आदि के आइकंस सिर्फ दिखावटी नहीं हैं। टच स्क्रीन वाले इस अनोखे कंप्यूटर पर आप न केवल खबरें और ब्लॉग पढ़ सकते हैं बल्कि स्क्रीनसेवर और वीडियो का मजा भी ले सकते हैं। 
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ब्लूम पीसी : 
अब लीजिए एक ऐसा कंप्यूटर, जिसमें कोई स्क्रीन ही नहीं है। ब्लूम पीसी में की-बोर्ड के अलावा अगर कुछ दिखता है तो सिर्फ तीन स्तंभ या शाखाएं, जिनके बीच खाली स्पेस में लेजर बीम्स के जरिए 2-डी और 3-डी पिक्चर बनाई जाती हैं और यही इसकी स्क्रीन होती है। इतने क्लीयर पिक्चर आपको किसी भी कंप्यूटर की स्क्रीन पर दिखाई नहीं देंगे। खासकर ग्राफिक आर्टिस्ट्स और फोटोग्राफरों के लिए तो यह बहुत काम का है। तीनों स्तंभों को आगे पीछे करके आप स्क्रीन साइज भी बदल सकते हैं। दोनों स्तंभों के अदंर साउंड सिस्टम मौजूद है। इसमें की-बोर्ड और स्टाइलस के जरिए काम होता है। इस 'कंप्यूटर' में बायोमीट्रिक सिस्टम लगा है, यानी यह आपको पहचान भी सकता है। 





ईईई की-बोर्ड पीसी : 
यह कंप्यूटर की-बोर्ड के ही अदंर है जिसका नाम 'ईईई की-बोर्ड पीसी' है। इसमें वायरसलैस कनेक्टिविटी और होम थिएटर भी है। इसके की-बोर्ड के अदंर मौजूद पांच इंच की स्क्रीन वाले इस कंप्यूटर में 1.6 गीगाहर्ट्स का एटम माइक्रोप्रोसेसर, एक जीबी रैम, 32 जीबी का हार्ड डिस्क के अलावा वाई-फाई, ब्लूटूथ, यूएसबी पोर्ट और ऑडियो इनपुट-आउटपुट भी है। 
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पेनटॉप भी : 
अमेरिका की 'लीप-फ्रॉग' कंपनी के फ्लाई वर्ल्ड 'पेनटॉप' कंप्यूटर में पेन जैसा दिखने वाला कंप्यूटर और डिजिटल पेपर होता है। पेन से लिखी गई चीजों को यह इनपुट के रूप में लेता है और साउंड के रूप में आउटपुट देता है। जैसे पांच गुणा सात लिखने पर पेनटॉप बोल उठता है : थर्टी फाइव। पेनटॉप इंग्लिश के शब्दों को फ्रेंच, स्पेनिश आदि भाषाओं में बदलकर उनका एकदम सही उच्चारण भी सुनाता है। जो लोग टाइप किए बिना कंप्यूटर पर काम करना चाहते हैं वह इससे लिखे गए वाक्यों को सीधे माइक्रोसॉफ्ट वर्ल्ड में ट्रांसफर कर सकते हैं। खाली समय में आप इसमें दिए मजेदार गेम्स भी खेल सकते हैं। यह इंटरनेट से भी कनेक्ट हो जाता है। आप इसका यूज गाने डाउनलोड कर एमपी-3 प्लेयर की तरह भी कर सकते हैं। 
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भाषा सहयोग : बालेन्दु भाई (नवभारत टाइम्स) 

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